छत्तीसगढ़ बजट…5,700 करोड़ से 2 लाख करोड़ तक:25 साल में 25 गुना रकम बढ़ी, रफ्तार बदली, अंदाज बदले, 5 वित्त-मंत्रियों के दौर की कहानी

“हिसाब-ए-दौर बदलता रहा, पर सवाल वही रहा,
खजाना कितना बढ़ा…और जेब में आया क्या?” छत्तीसगढ़ का बजट केवल आय-व्यय का बहीखाता नहीं, बल्कि 25 सालों की राजनीतिक सोच, प्रतीकों और प्राथमिकताओं की कहानी है। साल 2000 में राज्य गठन के समय बजट लगभग 5,700 करोड़ रुपए था। साल 2025-26 में यह बजट 1 लाख 65 हजार करोड़ तक पहुंचा। आज वही बजट 25 गुना बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपए की दहलीज तक पहुंचने की तैयारी में है। छत्तीसगढ़ सरकार का बजट 24 फरवरी को विधानसभा में पेश किया जाएगा। राज्य विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू हो रहा है और अगले दिन 24 फरवरी को बजट पेश किया जाएगा। ज्ञान-गति के बाद इस बार भी नए थीम के साथ बजट पेश किया जाएगा। बता दें कि यह साय सरकार का तीसरा बजट है। प्रदेश का यह 26वां बजट होगा। पहला बजट टेंट में पेश किया गया था। वित्त मंत्री रहे रामचंद्र सिंहदेव ने उंगलियों पर खर्च गिनाया था। वहीं रमन कार्यकाल में बगावत करने पर अमर अग्रवाल को वित्त मंत्री की कुर्सी गंवानी पड़ गई थी। भूपेश कार्यकाल की बात करें तो पहली बार गोबर से बने ब्रीफकेस से बजट पेश किया गया था, जबकि ओपी चौधरी ने ढोकरा शिल्प से बने ब्रीफकेस से GYAN थीम पर पहली बार डिजिटल बजट पेश किया था। इस रिपोर्ट में पढ़िए 5 वित्त मंत्री, 4 दौर और 2 लाख करोड़ के बजट तक पहुंचने की तैयारी की कहानी… टेंट में पेश हुआ था पहला बजट 2001 में वित्त मंत्री रामचंद्र सिंहदेव ने राजकुमार कॉलेज ग्राउंड में टेंट में बजट पेश किया था। रामचंद्र सिंहदेव इतने सख्त थे कि हर खर्चे के प्रस्ताव पर आपत्ति की उंगली रख देते थे। सरकारी खजाने से पैसा निकलवाना बहुत मुश्किल था। हां यह अलग विषय था कि उनका हर फैसला राज्य के हित में होता था। वे सरकारी कोष का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं कर सकते थे। बताया जाता है, सिंहदेव के इस रवैये के चलते जोगी सरकार में भी टकराव की स्थिति आई थी। कई विवाद भी उठे थे। जब बहीखाते से भारी पड़ी सियासत सत्ता के गलियारों में केवल आंकड़े नहीं, राजनीतिक समीकरण भी चलते हैं। भाजपा सरकार के दौरान डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री बने और वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी अमर अग्रवाल को सौंपी गई। साल 2006 में राजनीतिक परिस्थितियों ने करवट ली। भाजपा के 12 विधायकों ने रमन सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला। वे लोग दिल्ली जाकर केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी शिकायत भी कर आए थे। इनमें ननकीराम कंवर और अमर अग्रवाल भी शामिल थे। विवाद शांत हुआ, लेकिन बागी विधायकों पर कार्रवाई हो गई। अमर अग्रवाल से वित्त विभाग वापस ले लिया गया। यह घटना छत्तीसगढ़ के बजट इतिहास का अहम मोड़ रही, जब वित्तीय दस्तावेज से अधिक राजनीतिक गणित प्रभावी साबित हुआ। रमन राज, आमदनी ने पकड़ी रफ्तार इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने 12 बार बजट प्रस्तुत किया, जो एक रिकॉर्ड है। इसी अवधि में प्रति व्यक्ति आय में 4 बार 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की गई। बजट का आकार बढ़ा और आम लोगों की आय में भी सुधार दिखाई दिया। हालांकि रमन सिंह के कार्यकाल के बाद प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर घटकर लगभग 10-11 प्रतिशत रह गई। बजट लगातार बढ़ता रहा, लेकिन आय वृद्धि की गति कुछ धीमी पड़ गई। गोबर का ब्रीफकेस, राजनीति का प्रतीक 15 साल बाद 2018 में सत्ता पर कांग्रेस लौटी थी। इस दौरान छत्तीसगढ़िया वाद को खूब भुनाया। भूपेश बघेल ने प्रदेश में गोबर खरीदी शुरू की। इसी तर्ज पर साल 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गोबर से बने ब्रीफकेस में बजट पेश कर सबका ध्यान आकर्षित किया। यह प्रस्तुति छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बनी। गोकुल धाम गौठान में निर्मित यह ब्रीफकेस संदेश देता था कि प्रदेश अपनी परंपरा को आर्थिक नीति से जोड़ रहा है। ढोकरा शिल्प और डिजिटल दौर 17 सालों बाद राज्य को स्वतंत्र वित्त मंत्री के रूप में ओपी चौधरी मिले। ओपी चौधरी ने पहली बार जो ब्रीफकेस लेकर सदन में पहुंचे थे, वह ब्लैक कलर का था। ब्रीफकेस के फ्रंट पर आदिम जनजाति कला की प्रसिद्ध पहचान ‘ढोकरा शिल्प’ की झलक थी। पहली बार उन्होंने सदन में डिजिटल बजट पेश किया। पहला बजट ‘ज्ञान’-गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी पर केंद्रित रहा। दूसरा बजट ‘गति’ की रणनीति पर आधारित था। अब तीसरा बजट सुशासन, अधोसंरचना, तकनीक और इन्फ्रास्ट्रचर डेवलपमेंट पर केंद्रित है। 25 सालों में 25 गुना विस्तार राज्य का बजट 5,700 करोड़ रुपए से बढ़कर 1 लाख 65 हजार करोड़ से ज्यादा हो चुका है। साल 2026–27 में यह आंकड़ा 2 लाख करोड़ रुपए के करीब पहुंच सकता है, जो 25 सालों में 25 गुना बढ़ गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 1 लाख 62 हजार 870 रुपए है, जो प्रतिदिन लगभग 446 रुपए के बराबर है। बड़ा सवाल अब भी बाकी छत्तीसगढ़ के बजट की 25 वर्षों की यात्रा में हर सरकार ने अपनी अलग प्राथमिकताएं तय कीं, कभी वित्तीय अनुशासन, कभी सांस्कृतिक अस्मिता, कभी तकनीकी नवाचार। अब जब राज्य 2 लाख करोड़ रुपए की दहलीज पर है, तो असली कसौटी यही है कि क्या यह बढ़ती राशि आम नागरिक के जीवन में उतना ही प्रभावी बदलाव ला पाएगी, जितनी तेजी से बजट का आकार बढ़ा है। ………………… बजट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… 24 फरवरी को पेश होगा छत्तीसगढ़ का बजट: वित्त मंत्री बोले- विजन 2047 पर फोकस, कांग्रेस बोली- पहले मोदी के वादे पूरे करें छत्तीसगढ़ सरकार का बजट 24 फरवरी को विधानसभा में पेश किया जाएगा। इसकी जानकारी वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने दी है। उन्होंने बताया कि राज्य विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू हो रहा है और अगले दिन 24 फरवरी को बजट पेश किया जाएगा। ज्ञान-गति के बाद इस बार भी नए थीम के साथ बजट पेश किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर…

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