छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और AICC महासचिव भूपेश बघेल के घर पर ईडी ने छापेमारी की है। उनके भिलाई-3 पदुमनगर स्थित घर पर आज (सोमवार) सुबह चार गाड़ियों में टीम पहुंची है। दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक छत्तीसगढ़ के 14 ठिकानों पर छापे पड़े हैं। भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल से जुड़े कई ठिकानों पर भी रेड पड़ी है। छापे की यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग मामले से जुड़े कथित शराब घोटाले के साथ ही कोल लेवी और महादेव सट्टा ऐप से जुड़ी हो सकती है। इसके अलावा भिलाई के नेहरूनगर में मनोज राजपूत, चरोदा में अभिषेक ठाकुर और संदीप सिंह, कमल अग्रवाल किशोर राइस मिल दुर्ग, सुनील अग्रवाल सहेली ज्वेलर्स दुर्ग और बिल्डर अजय चौहान के यहां कार्रवाई चल रही है। पंजाब में कांग्रेस को रोकने का प्रयास इस छापे के बाद भूपेश बघेल के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया गया है कि, सात वर्षों से चले आ रहे झूठे केस को जब कोर्ट में बर्खास्त कर दिया गया तो ED के मेहमानों ने पूर्व सीएम के घर पर दबिश दी है। इस षड्यंत्र से कोई पंजाब में कांग्रेस को रोकने का प्रयास कर रहा है, तो यह गलतफहमी है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि, भाजपा के इशारे पर ईडी कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के भिलाई निवास पर पहुंची है। सट्टा केस में सालभर पहले FIR दरअसल, एक साल पहले महादेव सट्टा ऐप केस में EOW (आर्थिक अनुसंधान शाखा) ने ED की शिकायत पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल समेत 21 आरोपियों पर FIR दर्ज की थी। इसमें ऐप प्रमोटर सौरभ चंद्राकर, रवि उप्पल समेत कई अज्ञात पुलिस अफसर और कारोबारियों के नाम भी शामिल हैं। वहीं, उस समय बघेल ने इसे राजनीतिक षड्यंत्र बताया था। अब समझिए क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। A, B और C कैटेगरी में बांटकर किया गया घोटाला 2019 में डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी 75 रुपए और बाद के सालों में 100 रुपए कमीशन लिया जाता था। कमीशन देने में डिस्टलरी संचालकों को नुकसान ना हो, इसलिए नए टेंडर में शराब की कीमतों को बढ़ाया गया। साथ ही फर्म में सामान खरीदी करने के लिए ओवर बिलिंग करने की राहत दी गई। डिस्टलरी मालिक से ज्यादा शराब बनवाई। नकली होलोग्राम लगाकर सरकारी दुकानों से बिक्री करवाई गई। नकली होलोग्राम मिलने में आसानी हो, इसलिए एपी त्रिपाठी के माध्यम से होलोग्राम सप्लायर विधु गुप्ता से भी कॉन्टैक्ट किया गया। होलोग्राम के साथ ही शराब की खाली बोतल की जरूरत थी। खाली बोतल डिस्टलरी पहुंचाने की जिम्मेदारी अरविंद सिंह और उसके भतीजे अमित सिंह को दी गई। खाली बोतल पहुंचाने के अलावा अरविंद सिंह और अमित सिंह को नकली होलोग्राम वाली शराब के परिवहन की जिम्मेदारी भी मिली। सिंडिकेट में दुकान में काम करने वाले और आबकारी अधिकारियों को शामिल करने की जिम्मेदारी एपी त्रिपाठी को सिंडिकेट के कोर ग्रुप के सदस्यों ने दी। शराब बेचने के लिए प्रदेश के 15 जिलों को चुना गया। शराब खपाने का रिकॉर्ड सरकारी कागजों में ना चढ़ाने की नसीहत दुकान संचालकों को दी गई। डुप्लीकेट होलोग्राम वाली शराब बिना शुल्क अदा किए दुकानों तक पहुंचाई गई। इसकी एमआरपी सिंडिकेट के सदस्यों ने शुरुआत में प्रति पेटी 2880 रुपए रखी थी। इनकी खपत शुरू हुई, तो सिंडिकेट के सदस्यों ने इसकी कीमत 3840 रुपए कर दी। डिस्टलरी मालिकों को शराब सप्लाई करने पर शुरुआत में प्रति पेटी 560 रुपए दिया जाता था, जो बाद में 600 रुपए कर दिया गया था। ACB को जांच के दौरान साक्ष्य मिला है कि सिंडिकेट के सदस्यों ने दुकान कर्मचारियों और आबकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 40 लाख पेटी से अधिकारी शराब बेची है। देशी शराब को CSMCL के दुकानों से बिक्री करने के लिए डिस्टलरीज के सप्लाई एरिया को सिंडिकेट ने 8 जोन में बांटा। इन 8 जोन में हर डिस्टलरी का जोन निर्धारित होता था। 2019 में सिंडिकेट की ओर से टेंडर में नई सप्लाई जोन का निर्धारण प्रतिवर्ष कमीशन के आधार पर किया जाने लगा। एपी त्रिपाठी ने सिंडिकेट को शराब बिक्री का जोन अनुसार विश्लेषण मुहैया कराया था, ताकि क्षेत्र को कम-ज्यादा करके पैसा वसूल किया जा सके। इस प्रक्रिया को करके सिंडिकेट डिस्टलरी से कमीशन लेने लगा।
EOW के अधिकारियों को जांच के दौरान साक्ष्य मिले हैं कि तीन वित्तीय वर्ष में देशी शराब की सप्लाई के लिए डिस्टलरीज ने 52 करोड़ रुपए पार्ट C के तौर पर सिंडिकेट को दिया है। ED करीब एक साल से महादेव ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है। आरोप है कि इसमें छत्तीसगढ़ के उच्च पदस्थ राजनेताओं और नौकरशाहों के शामिल होने का पता चला है। ऐप के दो मुख्य प्रमोटर भी छत्तीसगढ़ से ही हैं। ED के अनुसार, इस मामले में करीब 6,000 करोड़ रुपए की आय आंकी गई है। अब समझें कि क्या है कोल स्कैम ———————————– महादेव ऐप से संबंधित ये खबरें भी पढ़ें… 1. ‘महादेव सट्टा ऐप मालिकों से केंद्र सरकार ने लिए पैसे’:FIR पर छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बोले- इनकी गीदड़ भभकियों से डरने वाला नहीं महादेव सट्टा ऐप केस में EOW की FIR में नाम आने पर छत्तीसगढ़ के पूर्व CM भूपेश बघेल ने इसे भाजपा और केंद्र सरकार की गीदड़ भभकी बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने ऐप मालिकों से पैसे लिए हैं। यही वजह है कि उन लोगों पर कार्रवाई नहीं की जा रही।पढ़ें पूरी खबर.. 2. ‘भूपेश बघेल को दिए गए थे 508 करोड़’:ED बोली- महादेव ऐप के प्रमोटर्स ने भेजी रकम; पूर्व CM बोले- राजनीतिक साजिश का हिस्सा छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के दौरान भूपेश बघेल को महादेव सट्टा ऐप प्रमोटर्स की तरफ से 508 करोड़ रुपए दिए गए थे। ED की चार्जशीट में ये खुलासा हुआ है। असीम दास के बयान के मुताबिक महादेव एप के एक प्रमोटर शुभम सोनी ने उसे कैश पहुंचाने का काम सौंपा था। इस पूर्व CM ने कहा कि, ED राजनीतिक आकाओं के इशारे पर साजिश कर रही है। पढ़ें पूरी खबर…
