रिलायंस के कंट्रोल वाली जियोस्टार ने ICC के साथ 2024-27 के इंडिया मीडिया राइट्स डील से बाहर निकलने का फैसला किया है। जियोस्टार ने ICC से कहा है कि भारी फाइनेंशियल नुकसान की वजह से वो चार साल की डील के बाकी दो साल पूरे नहीं कर पाएगी। 2026 में भारत-श्रीलंका में होने वाले मेन्स T20 वर्ल्ड कप से पहले लिए गए इस फैसले के बाद ICC ने सोनी, नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम वीडियो से संपर्क किया है। लेकिन अभी तक किसी भी प्लेटफॉर्म ने कीमत ज्यादा होने की वजह से राइट्स में दिलचस्पी नहीं दिखाई। ये डील 2024-27 के लिए $3 अरब (करीब 25,000 करोड़ रुपए) की थी, जिसमें हर साल एक बड़ा मेन्स इवेंट शामिल है। ये जानकारी इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में सामने आई है। डील से पीछे क्यों हट रही जियोस्टार… 2023 में ICC ने अपने 4 साल (2024 से 2027 तक) के सारे टूर्नामेंट्स के भारत में दिखाने के अधिकार जियोस्टार (तब स्टार इंडिया) को बेचे थे। करीब 25 हजार करोड़ रुपए में ये डील पक्की हुई थी। यानी जियोस्टार को हर साल औसतन 6,000 करोड़ रुपए ICC को देने थे। अब हुआ ये कि क्रिकेट दिखाने से जियोस्टार को जितनी कमाई हो रही है, वो बहुत कम है। ड्रीम11 जैसे गेमिंग एप्स पर बैन के बाद विज्ञापन भी पहले जितने नहीं आ रहे। घाटे को देखते हुए कंपनी ने अपने अकाउंट में पहले से ही “ये पैसा डूब जाएगा” मानकर अलग से रखना शुरू कर दिया है। इसे “प्रोविजन” कहते हैं। सीधे शब्दों में कहे तो जियोस्टार ने 25,000 करोड़ में माल खरीदा था, लेकिन अब लग रहा है कि वो माल बेचकर भी पूरा पैसा नहीं वसूल पाएगी, बल्कि उल्टा 25,760 करोड़ रुपए तक डूब जाएंगे। इसलिए अब कंपनी डील से बाहर निकलना चाहती है। ICC का अब आगे का प्लान क्या है? भारत ICC की कमाई का 80% देता है भारत ICC की रेवेन्यू का करीब 80% हिस्सा देता है, जो क्रिकेट की डिपेंडेंसी दिखाता है। ICC ने 2024 में $474 मिलियन (करीब 4,000 करोड़ रुपए) का सरप्लस कमाया। सरप्लस मतलब “अतिरिक्त कमाई” या प्रॉफिट (जैसे आपकी सैलरी से खर्चे कटने के बाद जो बचे)। ICC को प्रॉफिट तो जियोस्टार को नुकसान क्यों? जियोस्टार को भारत में मैच दिखाने के राइट्स मिले, लेकिन विज्ञापन और सब्सक्रिप्शन उम्मीद से कम आए। जियोस्टार की दिक्कतें रियल मनी गेमिंग बैन के बाद और ज्यादा बढ़ी है। ये एप्स क्रिकेट के सबसे बड़े एडवरटाइजर बन चुके थे। एक्जीक्यूटिव्स कहते हैं कि ट्रेडिशनल ब्रांड्स लौट आए हैं, लेकिन रियल मनी गेमिंग के बैन होने से बने गैप को भरना मुश्किल है। अब आगे क्या होगा, ICC के पास क्या ऑप्शन है? भारत में स्पोर्ट्स मीडिया का मार्केट जियोस्टार और सोनी पर ही निर्भर हो गया है। मर्जर के बाद ये वर्चुअल ड्यूओपॉली बन गई, जिससे ICC के पास ज्यादा चॉइस नहीं बची। सोनी ने एशियन क्रिकेट काउंसिल के $170 मिलियन, न्यूजीलैंड क्रिकेट के $100 मिलियन और इंग्लैंड बोर्ड के $200 मिलियन से ज्यादा के राइट्स ले रखे हैं, लेकिन ICC डील से दूर रह रही। नेटफ्लिक्स क्रिकेट से दूर है, वो WWE जैसे प्रॉपर्टीज पर फोकस कर रही। अमेजन का इन्वॉल्वमेंट लिमिटेड है। न्यूजीलैंड क्रिकेट के इंडिया राइट्स अगले साल खत्म हो जाएंगे। ग्लोबली स्ट्रीमर्स लाइव स्पोर्ट्स में इन्वेस्ट कर रहे हैं, लेकिन NBA, NFL जैसे लीग्स के बढ़ते कॉस्ट से सिलेक्टिव हो गए। IOC और FIFA को भी भारत में कम वैल्यूएशन मिल रही है। ICC के साथव कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक, जियोस्टार 2027 तक बाउंड है। यानी अगर कोई नया पार्टनर नहीं मिला तो उन्हें ही मैच ब्रॉडकास्ट करने पड़ेंगे, भले ही घाटा हो रहा हो।
