दीपावली से ठीक पहले गुजरात मंत्रीमंडल में फेरबदल होने जा रहा है। गुरुवार की रात 8 बजे मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सभी मंत्रियों को अपने घर बुलाया है। बताया जा रहा है कि यहां 8-10 मंत्री इस्तीफा दे सकते हैं। नवनियुक्त मंत्रियों का शपथ ग्रहण शुक्रवार, 17 अक्टूबर को सुबह 11:30 बजे गांधीनगर के महात्मा मंदिर में भाजपा के केंद्रीय नेताओं अमित शाह, जेपी नड्डा की उपस्थिति में होगा। गुजरात की मौजूदा कैबिनेट में सीएम पटेल समेत 17 मंत्री हैं। जिसमें आठ कैबिनेट रैंक के मंत्री हैं, जबकि इतने ही राज्य मंत्री (MoS) हैं। सभी भाजपा विधायकों और मंत्रियों को दो दिन तक गांधीनगर में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिन विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह मिलनी है, उन्हें फोन कर सूचना दे दी गई है। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सुनील बंसल गुजरात आएंगे
आज राष्ट्रीय संगठन महामंत्री सुनील बंसल गुजरात आएंगे। शाम तक राज्य के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मुंबई में एक कार्यक्रम से गुजरात लौट आएंगे। उसके बाद रात 8 बजे उनके आवास पर मीटिंग होगी। इसी दौरान मंत्रियों से इस्तीफे लेकर राज्यपाल देवव्रत आचार्य को सौंपे जाएंगे। इस्तीफों के साथ ही राज्यपाल को नए मंत्रियों की सूची सौंप दी जाएगी। अमित शाह रात को गुजरात पहुंचेंगे
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह गुरुवार की रात करीब 9 बजे गुजरात पहुंचेंगे। वहीं, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा शुक्रवार सुबह गुजरात पहुंचेंगे। आमतौर पर जब मंत्रिमंडल विस्तार होता है, तो भाजपा आलाकमान के इतने नेता मौजूद नहीं होते, इसलिए सरकार में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। कांग्रेस से आए नेताओं को मिल सकता है मंत्रीपद नए मंत्रिमंडल में उपमुख्यमंत्री भी शामिल हो सकते हैं। वर्तमान 16 में से 7-10 मंत्रियों को ड्रॉप करने और 5-7 मंत्रियों को रिपीट किए जाने की चर्चा है। नए चेहरों में कांग्रेस से आए अर्जुन मोढवाड़िया, अल्पेश ठाकोर, सीजे चावड़ा और हार्दिक पटेल को मौका मिलने की संभावना है। सौराष्ट्र से जयेश रादडिया और जीतू वाघानी को मंत्रिमंडल में जगह मिलना तय है। खासकर पाटीदारों को ज्यादा तवज्जो दिया जाएगा। इसके अलावा, उत्तर गुजरात से ठाकोर समुदाय के नेता को भी अच्छे विभाग मिल सकते हैं। इसके अलावा जिन राज्य मंत्रियों को हटाए जाने की संभावना है, उनमें मत्स्य पालन और पशुपालन मंत्री पुरुषोत्तम सोलंकी, पंचायत मंत्री बच्चूभाई खाबर, वन एवं पर्यावरण मंत्री मुकेश पटेल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री भीखूसिंह परमार और आदिवासी विकास मंत्री कुंवरजी हलपति शामिल हैं। अमरेली जिले से तीन चेहरे मंत्रिमंडल में जगह बनाने की होड़ में
सौराष्ट्र की राजनीति का केंद्र रहे अमरेली जिले से भी एक चेहरे को मंत्री पद मिल सकता है। 2017 में कांग्रेस ने जिले की सभी पांचों विधानसभा सीटों पर कब्जा जमाया था। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस का पूरी तरह सफाया कर दिया था। इसके अलावा, नगरपालिका और सहकारिता क्षेत्र में भी भाजपा का भगवा लहरा रहा है। वहीं, पाटीदार और कोली समुदाय का यहां हमेशा से दबदबा रहा है। अमरेली जिले की पांच विधानसभा सीटों में से चार पर पाटीदार विधायकों का कब्जा है। जबकि एक सीट पर कोली विधायक का कब्जा है। चूंकि कोली समुदाय से आने वाले और राज्य सरकार में वर्तमान मंत्री पुरुषोत्तम सोलंकी काफी समय से अस्वस्थ हैं। ऐसे में अगर उन्हें दोबारा नहीं चुना जाता है तो कोली समुदाय से आने वाले राजुला विधायक हीरा सोलंकी को मंत्री पद मिल सकता है। वहीं, अगर पुरुषोत्तम सोलंकी को दोबारा चुना जाता है, तो पाटीदार समुदाय से आने वाले दो पाटीदार विधायकों, कौशिक वेकारिया या महेश कासवाला में से किसी एक को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। 2027 के चुनाव की तैयारी
2022 के चुनाव के बाद भूपेंद्र पटेल को फिर से मुख्यमंत्री बनाया गया। उनके साथ 16 अन्य मंत्रियों को भी मंत्रिमंडल में जगह दी गई। इनमें मुख्यमंत्री के अलावा 8 कैबिनेट स्तर और 8 राज्य स्तर के मंत्री शामिल हैं। तीन साल से मंत्रिमंडल में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, 2027 के चुनाव की तैयारी भी करनी है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मौजूदा सरकार के ज्यादातर मंत्री भाजपा आलाकमान की उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं। इसके अलावा, हाल ही में हुए विसावदर विधानसभा उपचुनाव में मुख्यमंत्री, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष समेत ज्यादातर नेता AAP के गोपाल इटालिया को हराने के लिए विसावदर गए थे। इसके बाद भी विसावदर सीट नहीं जीत पाए। मंत्रिमंडल के विस्तार में इसका भी असर दिखाई देगा। पुराने दिग्गजों का को वापस लाने की तैयारी
राजनीतिक चर्चा है कि 2027 में होने वाले गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने विसावदर सीट जीतकर भाजपा को चिंता में डाल दिया है। इसलिए भाजपा भी अब कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती। भाजपा में ताकतवर माने जाने वाले लेकिन लंबे समय से किसी न किसी वजह से दरकिनार किए गए नेताओं को अब बड़े पद दिए जाएंगे और नई जिम्मेदारियाँ दी जाएंगी। आगे और नुकसान न हो, इसके लिए कुछ पुराने दिग्गोजों को भी फिर से मौका मिल सकता है।
सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए मंत्रिमंडल विस्तार
नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री कार्यकाल के बाद से गुजरात सरकार में लगातार बदलाव हुए हैं। आनंदीबेन पटेल और विजय रूपाणी सरकारों के अचानक इस्तीफे और अब मौजूदा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल सरकार में बदलाव। ये सारे बदलाव तभी हुए हैं, जब गुजरात की जनता में सत्ता विरोधी लहर का असर महसूस होने लगा। नरेंद्र मोदी की रणनीति हमेशा से कुछ लोगों की वजह से पूरी पार्टी की छवि खराब करने के बजाय सुधारात्मक कार्य करने की रही है। जनवरी में नगर पंचायत चुनाव भी होने हैं। 2021 में रूपाणी का पूरा मंत्रिमंडल बदल गया था
इसी तरह 4 साल पहले, भाजपा आलाकमान ने तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय रूपाणी समेत पूरे मंत्रिमंडल को अचानक बदलकर सबको चौंका दिया था। एक ऐसे घटनाक्रम में, जिसकी किसी को उम्मीद भी नहीं थी, विजय रूपाणी इस्तीफा देने राजभवन पहुंच गए थे। उनके इस्तीफे के बाद, भूपेंद्र पटेल मुख्यमंत्री बने। उनके नेतृत्व में भाजपा ने 2022 के चुनावों में 156 सीटों पर ऐतिहासिक जीत हासिल की।
