गड़बड़ी:‘80 करोड़ की हेल्पलाइन’ ने निर्माण श्रमिकों की 32 योजनाएं की प्रभावित

निर्माण श्रमिकों के 80 करोड़ रुपए प्रवासी मजदूरों की एक हेल्पलाइन बनाने में खर्च कर दिए गए। इसका खामियाजा यह हुआ कि श्रमिकों को दी जाने वाली ई-रिक्शा योजना, पढ़ाई, विवाह, जन्म-मृत्यु जैसी 32 योजनाएं प्रभावित हो गई। श्रम विभाग ने यह कारनामा करीब पांच साल पहले कांग्रेस की सरकार में किया था।
मामला 2020 का है, जब श्रम विभाग ने प्रवासी श्रमिकों के लिए एक निजी कंपनी मेसर्स दीपीजा टेलिकॉम हैदराबाद को हेल्पलाइन 0771-3505050 बनाने ठेका दिया। इसी हेल्पलाइन में करोड़ों रुपए खर्च कर दिए गए। श्रमिकों के उपकर की राशि सीधे उनके खाते में डीबीटी करने के अलावा अन्य कार्य में खर्च कर दी गई, जो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन है। नियमों के विपरीत जाकर इस राशि से हेल्पलाइन सेंटर शुरू कर दिया गया, इसके बाद भी इसे लेकर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब इसकी शिकायत सीधे सीएम विष्णुदेव साय से की गई है। दावा किया गया कि छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जहां उपकर की राशि का इस तरह दुरुपयोग हुआ। यह मामला विधानसभा में भी गूंजा था। मंत्री, मंडल अध्यक्ष और सचिव पर रुपयों के दुरुपयोग का लगा आरोप
पूर्व मंत्री और विधायक राजेश मूणत ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री से की है। उन्होंने सीएम को पत्र लिखकर नियमों का उल्लंघन करने वालों को निलंबित कर जांच करने की मांग की है। उनका आरोप है कि पूर्व सरकार ने इस प्रकरण में 80 करोड़ रुपए का दुरुपयोग किया है। मूणत ने पत्र में उल्लेख किया कि कांग्रेस शासन के दौरान यह घोटाला हुआ। मंडल द्वारा मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र बनाकर तत्कालीन मंडल अध्यक्ष सन्नी अग्रवाल, मंत्री शिव कुमार डहरिया, विभाग के सचिव अमृत खलखो और सचिव बीओसी सविता मिश्रा ने आपसी समन्वय से तीन साल में 80 करोड़ रुपए का दुरुपयोग किया। मूणत ने भास्कर से कहा कि एक जनप्रतिनिधि के नाते उन्होंने सदन में मुद्दा उठाया था। सीएम को भी पत्र लिखा है। अब सरकार को देखना है कि उसे इस मामले में क्या एक्शन लेना है। इन योजनाओं में खर्च होनी थी राशि { जन्म से मृत्यु तक दी जाने वाली मदद।
{ लड़कियों को नोनी योजना, विवाह व उच्च शिक्षा के लिए सहायता।
{ महिलाओं की कुछ योजनाओं को होल्ड पर रखा गया।
{ ई-रिक्शा के लिए महिलाएं दो साल से चक्कर काट रहीं।
{ बच्चों को छात्रवृत्ति, गणवेश व अन्य सुविधाएं।
{ बड़ी व्याधियों का इलाज का खर्च।
{ महिलाओं को प्रसूति सुविधा दिलाने में सहायता करना। ^यह नियम है कि भवन निर्माण के उपकर से मिलने वाली राशि निर्माण श्रमिकों के हित में ही खर्च करना है। ऐसा किया भी जा रहा है। संबंधित प्रकरण की शिकायत मेरे पास अभी नहीं आई है और न ही कोई जांच के निर्देश मिले हैं। वैसे कॉल सेंटर भी श्रमिकों के हित से ही जुड़ी योजना है।
– गिरिश रामटेके, सचिव बीओसी ऐसे की गई गड़बड़ी
छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार मंडल ऑटोनोमस बॉडी है। वह जहां कहीं भी भवन निर्माण होता है, उस पर 1 प्रतिशत उपकर संग्रह करता है। यह निर्माण मजदूरों के कल्याण पर व्यय होता है। सरकारी या निजी भवन बनाने पर सभी से उपकर वसूला जाता है। निकायों में नगरीय निकाय उपकर जमा करते हैं और सरकारी विभाग सीधे मंडल को उपकर जमा कराते हैं।

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