कोलकाता रेप-मर्डर केस में संजय रॉय दोषी करार:सजा का ऐलान सोमवार को, संजय बोला- मुझे फंसाया गया, इसमें IPS शामिल

कोलकाता के आरजी कर हॉस्पिटल में ट्रेनी डॉक्टर से रेप और मर्डर केस में सियालदह कोर्ट ने मुख्य आरोपी संजय रॉय को दोषी करार दिया है। जस्टिस अनिर्बान दास ने दोपहर 2.30 बजे फैसला सुनाया और कहा कि सजा का ऐलान सोमवार (20 जनवरी) को किया जाएगा। अदालत ने 162 दिन बाद फैसला सुनाया है। रेप-मर्डर की घटना 9 अगस्त 2024 की है और फैसला 18 जनवरी 2025 को आया है। CBI ने आरोपी संजय के लिए फांसी की मांग की है। फैसले के बाद दोषी संजय ने कहा- मुझे इस मामले में फंसाया गया है। मैंने यह काम नहीं किया। जिन्होंने ये काम किया है, उन्हें जाने दिया गया है। एक IPS इसमें शामिल है। आरजी कर हॉस्पिटल में 8-9 अगस्त की रात ट्रेनी डॉक्टर का रेप-मर्डर हुआ था। 9 अगस्त की सुबह डॉक्टर की लाश सेमिनार हॉल में मिली थी। CCTV फुटेज के आधार पर पुलिस ने संजय रॉय नाम के सिविक वॉलंटियर को 10 अगस्त को अरेस्ट किया था। CBI ने 10 दिसंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दी थी। जिसमें बताया था कि सियालदह ट्रायल कोर्ट में रेगुलर सुनवाई हुई और 81 गवाहों में से 43 से पूछताछ की गई। इधर, शनिवार को फैसले से पहले पीड़ित के पिता ने कहा है कि आरोपी की सजा कोर्ट तय करेगा, लेकिन जब तक हमें न्याय नहीं मिल जाता हम अदालत का दरवाजा खटखटाते रहेंगे। फैसले से जुड़ी 3 बड़ी बातें 1. फैसले का आधार फॉरेंसिक रिपोर्ट अदालत ने फॉरेंसिक रिपोर्ट को सजा का आधार बनाया, जो बताती है कि संजय रॉय इस मामले में शामिल था। घटना स्थल और पीड़ित डॉक्टर की बॉडी पर भी संजय का DNA मिला था। रॉय को भारत न्याय संहिता अधिनियम की धारा 64, 66 और 103(1) के तहत दोषी पाया गया है 2. अधिकतम सजा फांसी होगी जस्टिस अनिर्बान दास ने कहा कि इस मामले में अधिकतम सजा फांसी दी जा सकती है। कम से कम सजा आजीवन कारावास होगी। 3. दोषी संजय को बोलने का मौका मिलेगा जब दोषी संजय ने कहा कि उसे इस केस में फंसाया जा रहा है, इसके बाद जस्टिस अनिर्बान दास ने कहा कि सजा सुनाए जाने से पहले उसे बोलने का मौका मिलेगा। फैसले से पहले पीड़ित के पिता के 4 दावे फैसले में देरी के 3 कारण पहला कारण- 2 वकीलों ने केस छोड़ा दूसरा कारण- CBI को मामला देरी से सौंपा गया तीसरा कारण- अन्य आरोपियों के खिलाफ CBI 90 दिन में चार्जशीट दायर नहीं कर पाई 10 आरोपियों का पॉलीग्राफ टेस्ट CBI ने 25 अगस्त को सेंट्रल फोरेंसिक टीम की मदद से कोलकाता की प्रेसीडेंसी जेल में संजय का पॉलीग्राफ टेस्ट किया था। अधिकारियों ने करीब 3 घंटे उससे सवाल-जवाब किए। संजय समेत 10 लोगों का पॉलीग्राफ टेस्ट हुआ था। इनमें आरजी कर के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष, ASI अनूप दत्ता, 4 फेलो डॉक्टर, एक वॉलंटियर और दो गार्ड्स शामिल थे। CBI ने कहा था- ट्रेनी डॉक्टर का गैंगरेप नहीं हुआ CBI ने 7 अक्टूबर 2024 को कलकत्ता हाईकोर्ट में चार्जशीट दायर की, जिसमें कोलकाता पुलिस में सिविक वॉलेंटियर संजय को एकमात्र आरोपी बताया गया। एजेंसी ने बताया कि ट्रेनी डॉक्टर का गैंगरेप नहीं हुआ था। चार्जशीट में 100 गवाहों के बयान, 12 पॉलीग्राफ टेस्ट रिपोर्ट, CCTV फुटेज, फोरेंसिक रिपोर्ट, मोबाइल की कॉल डिटेल और लोकेशन शामिल रहीं। यह भी कहा गया है कि पीड़ित के शरीर से मिला सीमन सैंपल और खून आरोपी से मैच हुआ। वहीं क्राइम सीन पर मिले छोटे बाल भी फोरेंसिक जांच के बाद आरोपी के बालों से मैच हुए। संजय का इयरफोन, मोबाइल ब्लूटूथ से कनेक्ट हो गया था। इसे भी अहम सबूत माना गया। पैरेंट्स ने कहा था- सियालदह कोर्ट को सजा सुनाने से रोका जाए CBI जांच को लेकर ट्रेनी डॉक्टर के माता-पिता ने असंतोष जताया। उन्होंने मामले की निगरानी कर रहे सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट में भी याचिका दायर की है। उन्होंने अपील की है कि सियालदह स्पेशल कोर्ट को इस मामले में सजा सुनाने से रोका जाए और पूरे मामले की एक बार फिर नए सिरे से जांच की जाए। फोरेंसिक रिपोर्ट से आया ट्विस्ट, गद्दे पर हाथापाई के सबूत नहीं
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में ट्रेनी डॉक्टर से रेप-मर्डर केस में 24 दिसंबर को सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेट्री (CFSL) की एक रिपोर्ट सामने आई। जिसमें कई सनसनीखेज खुलासे थे। 12 पेज की रिपोर्ट में कहा गया था कि सेमिनार हॉल में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे पता चले कि वहां पीड़ित से रेप के बाद हत्या की गई। रिपोर्ट के 12वें पेज की आखिरी लाइनों में लिखा था- जिस जगह ट्रेनी डॉक्टर का शव मिला था, वहां संघर्ष का कोई सबूत नहीं मिला। जिस गद्दे पर शव था, उस पर भी किसी तरह की हाथापाई के निशान नहीं मिले।

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