कहीं पैंट में बिच्‍छू डाला, कहीं मरने तक उठक-बैठक कराए:टीचर पीटे तो 10 साल तक सजा का कानून; साइकोलॉजिस्ट ने कहा-टीचर्स का साइकोमैट्रिक टेस्ट हो

उत्तर-प्रदेश के सहारनपुर के एक स्कूल से बच्चे के साथ बर्बरता का मामला सामने आया है। मामला सहारनपुर के रामपुर मनिहारन क्षेत्र के चुनहेटी गांव के प्राथमिक विद्यालय का है। आरोप है कि लंच के बाद 7वीं क्लास के बच्चे फुटबॉल खेल रहे थे। खेल-खेल में बच्चों की फुटबॉल एक टीचर के बेटे को जा लगी। इससे टीचर नाराज हो गईं और बाल फेंकने वाले सातवीं के बच्चे को बेरहमी से पीट दिया। परिवार का आरोप है कि टीचर ने बच्चे का गला भी दबाया, थप्पड़ मारा और घसीटा, जिससे बच्चा बेहोश हो गया और बदहवास हालत में घर पहुंचा। इसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। हाल ही में स्‍कूलों में बच्‍चों की पिटाई के कुछ और मामले भी सामने आए हैं केस 1- महाराष्‍ट्र के पालघर जिले के एक प्राइवेट स्कूल में कक्षा 6 की छात्रा अंशिका की 15 नवंबर को मौत हो गई। छात्रा पिछले एक सप्‍ताह से अस्‍पताल में थी। दरअसल, एक सप्‍ताह पहले उसे 10 मिनट देर से पहुंचने पर स्‍कूल में सिटअप्‍स यानी उठक-बैठक लगाने की सजा दी गई थी। छात्रा की मां का कहना है कि उसके बाद से ही बेटी उठ भी नहीं पा रही थी। छात्रा की मौत के बाद प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी। केस 2- हिमाचल प्रदेश के शिमला में एक सरकारी स्‍कूल के 3 टीचर्स ने मिलकर कक्षा 1 के बच्‍चे को जमकर पीटा। इतना ही नहीं, उसकी पैंट में बिच्‍छू तक डाल दिया। पीटने वाले टीचर्स में स्‍कूल का हेडमास्‍टर भी शामिल है। छात्र दलित समुदाय से है और शिमला के रोहरू सब डिवीजन के गवर्नमेंट प्राइमरी स्‍कूल का स्‍टूडेंट है। बच्‍चे के पिता ने कहा कि हेडमास्‍टर देवेंद्र के साथ-साथ टीचर बाबूराम और कृतिका ठाकुर लगभग 1 साल से बच्‍चे के साथ मारपीट कर रहे थे। शिकायत के अनुसार, लगातार पिटाई से बच्‍चे के कान से खून बहने लगा और कान के पर्दे में भी चोट आईं। केस 3- शिमला के शिक्षा विभाग ने रोहरू सब-डिविजन में पोस्टेड सरकारी टीचर को सस्पेंड कर दिया है। दरअसल, कुछ ही दिन पहले इन्हीं टीचर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ था जिसमें वो एक स्टूडेंट को कांटे वाली छड़ी से बेरहमी से पीटती नजर आ रही थीं। टीचर का नाम रीना राठौड़ है और वो रोहरू ब्लॉक के गवाना प्राइमरी स्कूल में हेड टीचर के तौर पर तैनात थीं। टीचर ने पहले छात्र की शर्ट उतारी और उसे कांटे वाली छड़ी से पीटने लगी। इसका एक वीडियो वायरल हुआ जिसमें स्टूडेंट रोता हुआ नजर आ रहा है। केस 4- हरियाणा के पानीपत के एक स्कूल टीचर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में टीचर बच्चों के साथ मारपीट और खराब व्यवहार करती नजर आ रही है। कथित वीडियो पानीपत के सृजन पब्लिक स्कूल का है। वीडियो की शुरुआत में बच्चा मैट पर बैठा हुआ है। तभी टीचर उसे अपने पास बुलाती है और थप्पड़ लगाना शुरू कर देती है। वीडियो में आगे टीचर बच्चे का कान खींचती है और लगातार थप्पड़ जड़ रही है। एक अन्य वीडियो में सजा के तौर पर एक बच्चे को टीचर ने खिड़की से उल्टा लटका दिया। इतने नियम-कानूनों के बाद भी बच्चों के साथ मारपीट के मामलों में कमी नहीं आई है। इसके पीछे एक बड़ा कारण है कि नियमों का सही से पालन हो रहा है या नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए कोई नहीं है। इसके अलावा बच्चों के साथ मारपीट हमारे समाज में अपनाई गई चीज है, इसलिए इसके खिलाफ लोगों में उतना गुस्सा भी नहीं देखा जाता। प्यार से समझाने के पक्ष में पेरेंट्स दिल्ली पेरेंट्स असोसिएशन की अपराजिता गौतम कहती हैं, ‘कॉर्पोरल पनिशमेंट पूरी तरह से घरों और स्कूलों से खत्म नहीं है। लेकिन आज बहुत से पेरेंट्स इसे लेकर सेंसिटिव हो गए हैं। वो नहीं चाहते कि जैसे उन्हें बचपन में स्कूल में मारा गया, उनके बच्चों के साथ भी ऐसा ही हो। ऐसे पेरेंट्स चाहते हैं कि बच्चों को मारने-पीटने के बजाए बच्चों को बैठाकर प्यार से समझाया जाना चाहिए।’ इसके अलावा अपराजिता कहती हैं कि आज कई स्कूलों में एक क्लास में 50-60 बच्चे भी पढ़ते हैं। ऐसे में टीचर के लिए उन्हें हैंडल करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि वो बच्चों के साथ मारपीट करें। शैतानी करने पर या बच्चों को अनुशासन सिखाने के लिए उन्हें समझाया जाना चाहिए। उन्हें काउंसलर के पास भेज सकते हैं। अपराजिता कहती हैं, ‘आजकल बच्चों को बस यह चाहिए कि कोई उनकी बात सुन ले, उनका पक्ष समझ ले।’ पेरेंट्स को लेकर उन्होंने कहा, ‘पेरेंट्स और टीचर्स दोनों को सेंसेटाइज करने की जरूरत है। अब माहौल बदल चुका है। मारपीट बच्चों की समस्याओं का हल नहीं है।’ ‘टीचर्स की साइको-मैट्रिक टेस्टिंग हो’ स्कूल में टीचर्स द्वारा बच्चों के साथ दुर्व्यवहार करने को लेकर साइकोलॉजिस्ट अदिति सक्सेना कहती हैं, ‘आजकल स्कूलों में टीचर्स को एप्टीट्यूड टेस्ट के आधार पर भर्ती किया जाता है। यानी उनकी सब्जेक्ट नॉलेज चेक की जाती है। कोई टीचर मैथ्स में कितना अच्छा है, इंग्लिश में कितना अच्छा या हिंदी सब्जेक्ट का कितना ज्ञान है, केवल यही देखा जाता है। कोई भी स्कूल टीचर्स को रिक्रूट करते हुए यह नहीं देखता कि उस टीचर का बच्चों के साथ व्यवहार कैसा है, उनसे कैसे बात करता है। वो बच्चों के साथ कनेक्ट कर पाता है या नहीं।’ अदिति कहती हैं कि टीचर्स को भर्ती करते हुए एप्टीट्यूड के साथ-साथ साइको-मैट्रिक और पर्सनैलिटी टेस्टिंग भी की जानी चाहिए। वो कहती हैं कि अभी जो टीचर्स स्कूलों में पढ़ा रहे हैं उनके पास बच्चों के साथ डील करने को लेकर किस तरह की ट्रेनिंग है, कोई नहीं जानता। स्कूल में बच्चों को मारने-पीटने, उनके साथ दुर्व्यवहार या उनसे गलत तरीके से बात करने से बच्चे जिंदगी भर के लिए डैमेज हो जाते हैं। उनका आत्मविश्वास कम हो सकता है। कई बार इससे बच्चे इंट्रोवर्ट हो जाते हैं। इसके अलावा वो गुस्सैल और हिंसक भी हो सकते हैं। आप बच्चों को मारेंगे तो उन्हें लगेगा यही सॉल्यूशन है। वो भी अपने से कम उम्र के बच्चों को आगे चलकर मारेंगे। अगर बच्चों को कोई बात समझानी है या अनुशासन फॉलो करवाना है, तो इसके बारे में प्यार से उनसे बात करें। इसके अलावा अगर आप चाहते हैं कि बच्चा कोई नियम अपनाए तो सबसे पहले पेरेंट्स और टीचर्स को वह नियम अपने ऊपर लागू करना होगा। ———————————– ऐसी ही और खबरें पढ़ें… दिल्ली मेट्रो स्टेशन से कूदकर 10वीं के बच्चे का सुसाइड:पिता का आरोप- टीचर्स प्रताड़ित कर रहे थे; रैगिंग-बुलिंग स्टूडेंट सुसाइड का चौथा सबसे बड़ा कारण दिल्ली के एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले 16 साल के स्टूडेंट ने मंगलवार को सुसाइड कर लिया। वो अशोक पैलेस इलाके के सेंट कोलंबिया स्कूल में पढ़ता था। पूरी खबर पढ़ें…

More From Author

रिलायंस और एयरटेल इस हफ्ते बाजार के टॉप गेनर रहे:वैल्यू ₹73,000 करोड़ बढ़ी, 10 सबसे बड़ी कंपनियों में 7 की वैल्यू ₹1.28 लाख करोड़ बढ़ी

पंत भारत के 38वें टेस्ट-कप्तान, धोनी के बाद दूसरे विकेटकीपर:148 साल में पहली बार लंच से पहले टी-ब्रेक, राहुल से कैच छूटा; मोमेंट्स

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *