इंदौर में MPPSC के खिलाफ आंदोलन:इंटरव्यू अंकों में कटौती की मांग, 13 महीने बाद फिर शुरू हुआ धरना प्रदर्शन

इंदौर में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के सामने अभ्यर्थियों ने एक बार फिर शनिवार देर रात से आंदोलन शुरू कर दिया है। कोर्ट की अनुमति मिलने के बाद नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन (NEYU) के नेतृत्व में आयोग कार्यालय के बाहर धरना दिया जा रहा है। 10 सूत्री मांगों को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अगले चार दिन तक जारी रहेगा। धरने में कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंचे हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। अभ्यर्थियों ने आयोग परिसर के बाहर ही बिस्तर बिछा लिए हैं। अलाव जलाकर रात वहीं बिताई जा रही है। इस आंदोलन को अभ्यर्थियों ने ‘न्याय यात्रा 2.0’ नाम दिया है। दरअसल, ठीक 13 महीने पहले दिसंबर 2024 में भी सैकड़ों पीएससी अभ्यर्थियों ने इसी तरह का आंदोलन किया था, जो करीब एक सप्ताह तक चला था, तब जिला प्रशासन ने कई मांगें मानने का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया था, लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप है कि उन वादों में से अधिकांश आज तक पूरे नहीं हुए। हाईकोर्ट से मंजूरी के बाद धरना
एनईवाययू के संयोजक राधे जाट ने कहा कि मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं को लेकर एनईवाययू की न्याय यात्रा 2.0 को हाईकोर्ट इंदौर से मंजूरी मिल गई है। यह मंजूरी WP-3025-2026 में Article 19 के तहत दी गई है। यात्रा 10 सूत्रीय मांगों के लिए निकाली जा रही है। कोचिंग संस्थान, लाइब्रेरी और अन्य स्टूडेंट शांति पूर्वक आंदोलन में शामिल होंगे। हमें कोर्ट से शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने की अनुमति मिली है, इसलिए हम पूरी शांति से यहां धरना देंगे। पिछली मांगें अधूरी, नाराजगी बरकरार
पिछले आंदोलन के दौरान जिन 6–7 मांगों को मानने की बात कही गई थी, उनमें से केवल दो ही लागू हो सकीं। अधिक पदों पर भर्ती का वादा पूरा नहीं हो सका। अभ्यर्थियों का कहना है कि करीब 90 प्रतिशत मांगें आज भी लंबित हैं। सबसे बड़ी मांग: इंटरव्यू अंकों में कटौती
अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग स्टेट सर्विस परीक्षा के इंटरव्यू अंकों को लेकर है। उनका कहना है कि185 अंकों का इंटरव्यू अत्यधिक है, इससे चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की आशंका रहती है। इसे घटाकर 100 अंक किया जाए। जब तक मांगे नहीं मानी धरना जारी रहेगा छात्र अभिषेक जाट ने कहा कि हम पिछले दो–तीन वर्षों से लगातार परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन MPPSC हर साल पदों की संख्या घटाता जा रहा है। इसी के विरोध में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब तक आयोग मांगें नहीं मानता, तब तक धरना जारी रहेगा। आंदोलन के कारण पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। अभिषेक ने बताया कि पिछले आंदोलन के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को पद बढ़ाने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बावजूद पिछले वर्ष केवल 158 और इस बार 156 पद ही घोषित किए गए। आश्वासन के बाद भी मांगे पूरी नहीं की रणजीत किसानवंशी, MPPSC अभ्यर्थी ने कहा कि वर्ष 2024 में उन्होंने बड़ा छात्र आंदोलन किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री और MPPSC प्रतिनिधियों से मुलाकात हुई, जहां मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया गया था। जुलाई में आयोग को रिमाइंड ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन इसके बाद उन पर एफआईआर दर्ज कर दी गई। अक्टूबर-नवंबर में दोबारा ज्ञापन दिया गया, फिर भी कोई समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि उन्हीं लंबित मांगों को लेकर दोबारा धरने पर बैठना पड़ा है, लेकिन पूरी रात बीतने के बाद भी MPPSC का कोई अधिकारी या कर्मचारी ज्ञापन लेने तक नहीं पहुंचा।

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