अमेरिका ने मंगलवार को अरब सागर में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ईरान का शाहेद-139 ड्रोन अमेरिका के ‘USS अब्राहम लिंकन’ एयरक्राफ्ट कैरियर के पास पहुंच रहा था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के बयान के अनुसार, अमेरिकी सेना ने आत्मरक्षा में कार्रवाई की और F-35C फाइटर जेट से ईरानी ड्रोन को मार गिराया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे ईरान की तरफ से एक ‘आक्रामक’ व्यवहार बताया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ड्रोन किस मकसद से तैनात किया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ड्रोन ने कमांड की तरफ से किये गए नॉन-लेथल डिफ्यूजन कोशिशों के बावजूद अपनी दिशा नहीं बदली। इसके चलते फोर्स का इस्तेमाल किया गया। इस कार्रवाई में किसी अमेरिकी सैन्य कर्मी को कोई चोट नहीं लगी और कोई हथियार भी क्षतिग्रस्त नहीं हुआ है। इस घटना पर ईरान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है और वार्ताओं को फिर से शुरू करने के प्रयास जारी हैं। दोनों देशों के बीच शुक्रवार को तुर्किये में महत्वपूर्ण बैठक होने की उम्मीद है। कई क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूत स्टीव विटकॉफ, उनके दामाद और सलाहकार जेरेड कुशनेर और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची इस बैठक में शामिल होंगे। साथ ही तुर्किये, कतर और मिस्र के वरिष्ठ अधिकारियों के भी मौजूद रहने की संभावना है। कुछ सूत्रों के मुताबिक, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, ओमान और पाकिस्तान जैसे अन्य देशों के प्रतिनिधि भी इसमें भाग ले सकते हैं। ट्रम्प ने हाल ही में ईरान पर हमले की धमकी दी थी। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिकी जहाजों का एक बड़ा बेड़ा ईरान की ओर बढ़ रहा है और अगर समझौता नहीं हुआ तो बुरे हालात हो सकते हैं। पिछले महीने ईरान में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए, जिसमें हजारों लोगों की मौत हुई थी। ट्रम्प ने तब भी हस्तक्षेप की धमकी दी थी। वे ईरान में शासन परिवर्तन की बात भी कर चुके हैं। ईरान के नेता धमकियों के बीच बातचीत से इनकार कर रहे थे, लेकिन अब वे बात करने के लिए तैयार दिख रहे हैं। ईरानी अधिकारी कह रहे हैं कि उनका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ ऊर्जा के लिए है, हथियारों के लिए नहीं। वे अमेरिका की ओर से दिए गए प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार हैं।
