जयप्रकाश एसोसिएट्स को खरीदने के लिए अडाणी एंटरप्राइजेज का 14,500 करोड़ रुपए का रिजोल्यूशन प्लान मंजूर हो गया है। क्रेडिटर्स की कमेटी ने इसे अप्रूवल दे दिया है। अप्रूवल के बाद 19 नवंबर को अडाणी को लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) भी मिल गया। हालांकि, ये डील तभी पूरी होगी जब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) इसे अप्रूव करेगा। जेपी एसोसिएट्स पर बैंकों का करीब 55,000 करोड़ रुपए का कर्ज है। कंपनी डिफॉल्ट कर चुकी है, इसलिए जून 2024 से ये इनसॉल्वेंसी प्रोसेस में है। जून 2025 में अडाणी के अलावा वेदांता, डालमिया, जिंदल पावर और PNC इंफ्राटेक ने भी बोली लगाई थी। सितंबर में स्विस चैलेंज ऑक्शन हुआ, लेकिन अडाणी का प्लान बेहतर अपफ्रंट कैश की वजह से चुना गया। कंपनी करीब 6,000 करोड़ रुपए की तुरंत पेमेंट करेगी। अडाणी एंटरप्राइजेज में 20% तेजी आ सकती है इंटरनेशनल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कहा कि इससे कंपनी के शेयर में 20% तक की तेजी आ सकती है। जेफरीज ने टारगेट प्राइस 2,940 रुपए बताया। जेपी एसोसिएट्स के पास सीमेंट, पावर, रियल एस्टेट, होटल और कंस्ट्रक्शन एसेट्स हैं। जेफरीज का कहना है कि ये अडाणी ग्रुप की मौजूदा बिजनेस के साथ अच्छे से मैच करते हैं। सीमेंट के प्लांट अंबुजा सीमेंट में जा सकते हैं, पावर एसेट्स अडाणी पावर या अडाणी ग्रीन में, रियल एस्टेट और लैंड अडाणी रियल्टी में शिफ्ट हो सकता है। रोड प्रोजेक्ट्स अडाणी रोड्स के पास रहेंगे। इससे हर बिजनेस यूनिट अपनी कैपेसिटी के हिसाब से ग्रोथ कर सकेगी। जेपी पावर का शेयर 2 दिन में करीब 20% चढ़ा इस खबर के बाद जयप्रकाश पावर वेंचर्स का शेयर लगातार दूसरे दिन चढ़ा। दो सेशन में यह करीब 20%चढ़ चुका है। हालांकि, जेपी एसोसिएट्स के शेयर अभी भी ट्रेडिंग रेस्ट्रिक्टेड हैं, यानी इनकी खरीद-बिक्री पर पाबंदी है। इसका प्राइस 3 रुपए के आस-पास है। अब इस मामले से जुड़े जरूरी सवालों के जवाब… सवाल 1: जेपी एसोसिएट्स क्या करती है और मुसीबत में कैसे फंस गई? जवाब: 1995 में बनी जेपी एसोसिएट्स रियल एस्टेट, सीमेंट, पावर जैसे सेक्टरों में काम करती थी। दिल्ली-नोएडा जैसे शहरों में इसके जेपी विशटाउन जैसे बड़े-बड़े प्रोजेक्ट्स थे। कंपनी ने बिजनेस बढ़ाने के लिए बैंकों से कर्ज लिया, लेकिन इसे चुकाने में नाकाम रही। प्रोजेक्ट्स में देरी, मार्केट में मंदी और मैनेजमेंट की कुछ गलतियां भी इसकी वजह बनीं। आखिरकार, 3 जून 2024 को NCLT की इलाहाबाद बेंच ने कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया में भेज दिया। फरवरी 2025 में कंपनी पर करीब 55 हजार करोड़ रुपए का कर्ज था। सवाल 2: ये दिवालिया प्रक्रिया क्या होती है? जवाब: आसान भाषा में कहें तो, जब कोई कंपनी अपने कर्ज नहीं चुका पाती, तो उसे दिवालिया घोषित किया जाता है। इसके बाद इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) के तहत एक प्रक्रिया शुरू होती है, जिसमें कंपनी को या तो बचाने की कोशिश की जाती है या फिर उसकी संपत्तियां बेचकर कर्जदाताओं को उनका पैसा लौटाया जाता है। जेपी एसोसिएट्स के मामले में भी यही हुआ। कंपनी को बचाने के लिए कई कंपनियों ने बोली लगाई, ताकि इसे खरीदकर इसका बिजनेस फिर से पटरी पर लाया जा सके। सवाल 3: जेपी के कर्ज का क्या होगा? जवाब: जेपी एसोसिएट्स पर करीब ₹55 हजार करोड़ का कर्ज है। अगर अडाणी ग्रुप इसे ₹14,500 करोड़ में खरीदता है, तो कर्जदाताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। सवाल 4: आम लोगों पर इसका क्या असर होगा? जवाब: जेपी एसोसिएट्स के कई रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स, खासकर नोएडा में, अधूरे पड़े हैं। हजारों लोग, जिन्होंने जेपी के फ्लैट्स में पैसा लगाया था, पजेशन का इंतजार कर रहे हैं। अगर अडाणी ग्रुप कंपनी को खरीदता है, तो उम्मीद है कि वो इन प्रोजेक्ट्स को पूरा करेगा, जिससे होमबायर्स को राहत मिल सकती है। सवाल 7: अब आगे क्या होगा? जवाब: अभी NCLT की मंजूरी बाकी है। फाइनल डिसीजन जल्द लिया जाएगा। अगर अडाणी ग्रुप इसे खरीद लेता है, तो वो जेपी के बिजनेस को अपने तरीके से चलाएगा। साथ ही, शेयर बाजार में जेपी के स्टॉक्स पर भी नजर रहेगी, क्योंकि निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
