सरकार आज यानी 12 नवंबर को अक्टूबर महीने के रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी करेगी। एक्सपर्ट्स के अनुसार बीते महीने महंगाई दर 0.50% के रिकॉर्ड सबसे निचले स्तर पर आ सकती है। इसका कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में लगातार कमी और GST में कटौती का असर है। ये महंगाई दर बेस ईयर 2012 के आधार पर सबसे कम होगी। इससे पहले सितंबर में रिटेल महंगाई करीब 8 साल के निचले स्तर 1.54% पर आ गई थी। इससे पहले जून 2017 में ये 1.46% रही थी, जो अब तक की सबसे कम महंगाई दर है। सितंबर में खाने-पीने की कुछ वस्तुओं की कीमतों में गिरावट रही थी। वहीं अगस्त में रिटेल महंगाई 2.07% रही थी। बेस ईयर क्या होता है? ये क्यों जरूरी है? बेस ईयर कैसे चुना जाता है और कैसे काम करता है? महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?
महंगाई का बढ़ना और घटना प्रोडक्ट की डिमांड और सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। ज्यादा चीजें खरीदने से चीजों की डिमांड बढ़ेगी और डिमांड के मुताबिक सप्लाई नहीं होने पर इन चीजों की कीमत बढ़ेगी। इस तरह बाजार महंगाई की चपेट में आ जाता है। सीधे शब्दों में कहें तो बाजार में पैसों का अत्यधिक बहाव या चीजों की शॉर्टेज महंगाई का कारण बनता है। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। CPI से तय होती है महंगाई
एक ग्राहक के तौर पर आप और हम रिटेल मार्केट से सामान खरीदते हैं। इससे जुड़ी कीमतों में हुए बदलाव को दिखाने का काम कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स यानी CPI करता है। हम सामान और सर्विसेज के लिए जो औसत मूल्य चुकाते हैं, CPI उसी को मापता है।
